मंगलवार, 4 नवंबर 2014

नवभारत कार्यालय में ऐरोली के युवा विधायक श्री संदीपजी नाईक

ऐरोली के युवा विधायक  श्री संदीपजी नाईक ने 
मंगलवार को सुबह ठीक ११.०० बजे वादे  के मुताबिक नवभारत कार्यालय में सदिच्छा भेंट  दी.बतौर राजनीतिक प्रतिनिधि उनके स्वागत के बाद की तस्वीर।। बात-चीत में उनकी 
परिपक्वता ,जनता और समाज को समझने की परख, बदले हालात  में स्वयं की जिम्मेदारी का एहसास उनमे साफ़ नजर आया.नाईक परिवार में अलग छवि तैयार करते 
हुए जरुरत पड़ने पर प्रखर विरोध की 
मनसा भी दिखी।विजन और धैर्य दोनों साथ-साथ । काबिले तारीफ।।  


रविवार, 19 अक्टूबर 2014

ठाणे-रायगढ़ में चला मोदी का मैजिक


मंदा म्हात्रे ने बेलापुर में खिलाया कमल
ऐरोली से राकां के संदिप नाईक विजयी
सुधीर शर्मा

नवी मुंबई. लोकनेता गणेश नाईक का गढ़ कहलाने वाली नवी मुंबई की बेलापुर सीट राकां के हाथ से चली गयी जबकि ऐरोली सीट पर राकां का कब्जा बरकरार रहा. रविवार को आए चुनावी नतीजों के अनुसार भाजपा की मंदा म्हात्रे बेलापुर सीट से कमल खिलाने में कामयाब रहीं. मंदा को कुल 55316 मत मिले वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस के गणेश नाईक को 53,825 वोट प्राप्त हुए. 20वें राऊंड तक पीछे चल रही मंदा म्हात्रे 25वें चरण की गिनती में शिवसेना के विजय नाहटा और घड़ी को पीछे छोड़ते हुए राकां को 1491 मतों से हराने में सफल रहीं.जबकि आखिरी दौर तक राकां को कड़ी टक्कर दे रहे विजय नाहटा 50,983 वोट पाकर तीसरे नंबर पर चले गए.  हाथ के पंजे के साथ 15 साल बाद  चुनाव में उतरे नामदेव रामा भगत को कुल 16,604 वोट मिले जबकि मनसे के गजानन काले को सिर्फ 4193 वोटों से ही संतोष करना पड़ा. बहुजन समाज पार्टी के दीपक सावंत दलितों का वोट बटोरने में नाकाम रहे उन्हें केवल 2053 मत हासिल हुए. निर्दलीयों में प्रकल्पग्रस्तों की ओर से खड़े डॉ. राजेश पाटिल को सबसे ज्यादा 3722 वोट मिले. वहीं गौतम गायकवाड़ बेलापुर सीट से सबसे कम वोट पाने वाले कैंडिडेट रहे जिन्हें कुल 113 मत मिला. रविवार को वाशी सेक्टर 4 में स्थित सेक्रेट हार्ट हाईस्कूल प्रांगण में वोटों की गिनती सुबह 9 बजे से भारी पुलिस बंदोबस्त एवं सुरक्षा इंतजामों के बीच करायी गयी.यहां पुलिस आयुक्त के,एल प्रसाद सहित कई पुलिस उच्चाधिकारी गतिविधियों की स्वयं निगरानी में लगे थे. जीत के बाद अपनी प्रतिक्रिया में मंदाम्हात्रे ने राकां के गणेश नाईक को पराजित करने को बड़ी उपलब्धि माना और मोदी के मार्गदर्शन में विकास को आगे बढ़ाने का संकल्प दुहराया.

मोदी की लहर ने दिलाई विजय 
नवी मुंबई से भाजपा की मंदा म्हात्रे एवं पनवेल से प्रशांत ठाकुर की जीत को मोदी लहर का बड़ा असर माना जा रहा है. जानकारों की राय में सीधा प्रचार एवं ठाणे-मुंबई आदि ठिकानों पर हुई पीएम मोदी की सभा का असर ठाणे एवं रायगढ़ जिले के प्रत्याशियों का जनाधार बढ़ाने एवं जीत का इतिहास रचने में सबसे बड़ा जरिया बना.हालांकि विकास के मामले में देश में नंबर वन मानी जाने वाली नवी मुंबई महानगर पालिका के सलाहकार और राकां नेता गणेश नाईक को यहां से पराजय का मुंह देखना पड़ा है. 1999 में भी वे शिवसेना के सिताराम भोईर से पराजित हुए थे लेकिन इस बार उन्हें शिवसेना से नहीं बल्कि राकां छोड़कर भाजपा में आयी मंदाताई म्हात्रे से हारना पड़ा है.गणेश नाईक को नवी मुंबई के विकल्प के रुप में पहचाना जाता है, पिछले 25 सालों से लगातार उनके परिवार का राजनीतिक वर्चस्व बरकरार रहा है हालांकि उसमें दरार पडऩे लगी है. मई 2014 के लोकसभा चुनाव में संजीव नाईक की शिवसेना प्रत्याशी राजन विचारे के सामने हार तथा अब विधानसभा में पूर्व एमएलसी मंदाताई म्हात्रे के सामने पराजय राकां के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. जानकार मानते हैं कि किंग मेकर रहे गणेश नाईक के हारने से नवी मुंबई में दलगत विरोधियों की सक्रियता एवं मनपा में सत्ता के खिलाफ नये राजनीतिक समीकरण को बल दे सकता है जो उनके जनाधार के लिए खतरनाक बनेगा.
ऐरोली से संदिप नाईक दूसरी बार जीते
सतत संपर्क, विकास को प्राथमिकता एवं जन समस्याओं को लेकर सदैव आवाज बुलंद करने के कारण सबके चहेते रहे राकां प्रत्याशी संदिप नाईक ऐरोली से दूसरी बार विधायक बनने में सफल रहे. उन्होंने अपने पुराने प्रतिद्वंदी विजय चौगुले को 8725 मतों से हराकर शानदार जीत हासिल कर ली.2009 में भी उन्होंने शिवसेना को पराजित किया था. रविवार को संपन्न हुई मतगणना में संदिप नाईक को कुल 76,444 मत प्राप्त हुए वहीं शिवसेना के विजय चौगुले को कुल 67,719 वोट मिले. यहीं से भाजपा उम्मीदवार वैभव तुकाराम नाईक 46,405 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे. कांग्रेस के रमाकांत म्हात्रे को 8794 मत तथा मनसे के गजानन खबाले को 4111 वोट प्र्राप्त हुए. रिपाई के रिटेश भागे को सबसे कम 112 वोट जबकि निर्दलीयों में के.आर.गोपी को सर्वाधिक 907 वोट मिले. यहां अकेली महिला कैंडिडेट सुनीता मोहन तुपसौन्दर्या को 417 मत हासिल हुए.
विकास को देंगे नयी गति-संदिप
 जीत की घोषणा के बाद राकां विधायक संदिप नाईक ने कहा कि अपने पिता गणेश नाईक के मार्गदर्शन में विकास के विजन के साथ नवी मुंबई को बेहतरीन सेवा-सुविधाओं वाला आधुनिक शहर बनाने का अभियान हम आगे भी जारी रखेंगे. उन्होंने सभी नवी मुंबईकरों को बहुमत दिलाने पर आभार व्यक्त किया.
पनवेल में प्रशांत ठाकुर की शानदार जीत 
कांटे की टक्कर के बीच शेकाप उम्मीदवार बालाराम पाटिल को 13,224 मतों से हराते हुए भाजपा के प्रशांत ठाकुर पनवेल में कमल खिलाने में सफल रहे. 12 सिंतबर को टोलमाफी नहीं देने से नाराज प्रशांत ठाकुर ने विधायक पद से इस्तीफा देते हुए कांग्रेस से हाथ छुड़ा लिया था.और भाजपा के टिकट पर पनवेल से चुनाव लड़े थे. कांग्रेस खेमे को छोडऩे के बाद भाजपा उम्मीदवार के तौर पर उनकी जीत चुनौतियों से भरी थी हालांकि पनवेल में विकास को नया मुकाम दे चुके प्रशांत ठाकु र को जनता ने अपनाते हुए दो वे जीतने में सफल रहे. प्रशांत ठाकुर को कुल 1 लाख 24,817 वोट मिले जबकि शेकाप के बालाराम पाटिल को 1 लाख 11,647 मतों पर ही संतोष क रना पड़ा. शिवसेना के वासुदेव घरत 17,913 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे. कांग्रेस के आर.सी.घरत को 9263 मत प्राप्त हुए. 6566 वोटों के साथ मनसे प्रत्याशी केशरीनाथ पाटिल पांचवें नंबर पर रहे. यहां निर्दलीयों में सबसे कम वोट पाने वालों में महादेव पवार तथा सर्वाधिक मत पाने वाले बालूसेठ गजानन पाटिल रहे.
जनता का विश्वास कायम रखेंगे-प्रशांत
यह जीत जनता की है. विकास को समर्पित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सभी वर्गों को साथ लेकर पनवेल के सम्पूर्ण विकास के लिए काम करेंगे. जनता ने विजय दिलाकर जो विश्वास जताया है उसे हर संभव कायम रखेंगे.

उरण में शिवसेना के मनोहर भोईर जीते
नवी मुंबई में शिवसेना की दोनों सीटों पर हार से उलट शेकाप के  गढ़ उरण में शिवसेना के मनोहर भोईर ने कांग्रेस-बीजेपी को पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल कर ली. यहां विधायक रहे शेकाप के विवेक पाटिल को 1349 मतों से हराकर मनोहर भोईर ने उरण में भगवा फहरा दिया.शिवसेना के भोईर को कुल 45,416 मत मिले जबकि शेकाप के विवेक पाटिल को 44,067 वोट प्राप्त हुए .कांग्रेस के महेन्द्र घरत यहां 28443 मतों के साथ तीसरे नंबर पर रहे. उरण में अन्य क्षेत्रों की बजाय मोदी मैजिक फेल रहा. यहां भाजपा के महेश बालदी को 27,152 वोट पाकर कांग्रेस से पीछे रहना पड़ा. वहीं मनसे के अतुल भगत को 2796, एनसीपी के प्रशांत पाटिल को 2691 एवं समाजवादी पार्टी के दीपक पाटिल को केवल 1474 वोटों पर ही सिमटने के कारण अपनी जमानत बचा पाने में भी नाकाम रहे.

बुधवार, 15 अक्टूबर 2014

नोट की लालच में लाखों ने डाला वोट

चुनाव में हर तरफ बोलता रहा पैसा 
symbolic photo from google
संविधान को सबसे ऊपर कहने वाले, देश की सेवा का ढोंग करने वाले ऐसे कितने ही अनगिन लोगों समाजसेवियों को इस बार के चुनाव ने बेईमान बना दिया। वोट के बदले नोट रोकने की तमाम फालतू कोशिशों के बीच नेताओं और प्रत्याशियों के समर्थकों ने  माई बाप मानकर खूब पैसा लुटाया।यह पैसा हारने पर हवा में गया लेकिन जीते तो हम जनता की कल्याणकारी योजनाओं से निकालेंगे ये उम्मीदवार जिनसे हमने प्यासे लेकर विकास की उम्मीद पाली है।  लोकतंत्र को लूटने में जो चोर लगे हैं हम उन्हें नेता कहते हैं ,जो लूट में हिस्सेदार बन रहे हैं उनमे जनता भी आ गयी है। तो हुए न चोर चोर मौसेरे भाई।फिर अब कोई लूट या घोटाला हो तो किसी नेता मंत्री को मत कोसना। …
गौर करें तो इस बार ठाणे एवं रायगढ़ दोनों ही जिलों में मतदान का प्रतिशत 2009 की अपेक्षा 5 से 6 फीसदी ज्यादा नजर आया. जानकारों की राय में वोटिंग परसेन्टेंज का बढऩे के पीछे गठबंधन की बजाय अलग चुनाव लडऩा, स्पर्धा में सबकी प्रतिष्ठा एवं वर्चस्व की लड़ाई का होना तथा सोसल मीडिया का इस्तेमाल के अलावा वोट के बदले जमकर नोट बांटना मुख्य कारण हैं.हालांंकि निर्वाचन विभाग एवं सुरक्षा एजेंसियां पारदर्शी एवं निष्पक्ष तथा शांतिपुर्ण चुनाव की सफलता पर अपनी पीठ थपथपा रहा है.
आंकड़ों के अनुसार 2009 के विधानसभा चुनाव में ठाणे में औसत 51.53 प्रश मतदान हुआ जिसमें इस बार 4 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है. वहीं नवी मुंबई की बेलापुर सीट पर पिछले साल 46.71 के बदले इस बार ४ प्रतिशत वृद्धि के साथ ५० फीसदी मतदान हुआ है. ऐरोली में में भी पिछले बार की तुलना में तरकरीबन 5 फीसदी अधिक मतदाताओं ने वोट डाला है.यहां इस बार 54 फीसदी मतदान दर्ज हुआ है. ग्रामीण इलाका होने के बावजूद उरण में वोटिंग के प्रति बढ़े रुझान के कारण 2009 में हुए 68.29 की तुलना में 4 प्रतिशत ज्यादा 72 फीसदी मतदान हुआ है.वहीं पनवेल में इस बार कुल 67 प्रतिशत वोटिंग हुई जो 2009 की 61.64 की तुलना में 6 फीसदी अधिक है.

बुधवार, 24 सितंबर 2014

गठबंधन टूटा तो कहां से लाएंगे प्रत्याशी


गठबंधन टूटा तो कहां से लाएंगे प्रत्याशी

नवी मुंबई. शिवसेना और बीजेपी में सीटों को लेकर चल रहे घमासान के बीच एक नया जिन्न पैदा हो गया है. यह विधान सभा के लिए योग्य उम्मीदवारों का वह जिन्न है. जो सवाल पूछने लगा है कि सीट बंटवारे पर मची तकरार के बाद अगर महायुति या आघाड़ी टूटती है तो राज्य की 288 सीटों के लिए योग्य और सक्षम उम्मीदवार कहां से आएंगे. उदाहरण के तौर पर नवी मुंबई की महज दो सीटों पर ही कांग्रेस और बीजेपी के पास योग्य प्रत्याशियों का अकाल है फिर अकेले चुनाव अखिर किसके दम पर लड़ा जााएगा. पड़ोस के पनवेल विधानसभा सीट का भी यही हाल है जहां विधायक प्रशांत ठाकुर के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के सामने नए उम्मीदवार की मुसीबत खड़ी हो गयी है. इस मामले में जहां महायुति में शिवसेना आगे है वहीं आघाड़ी में एनसीपी का पलड़ा भारी है. हालांकि गठबंधन तोड़कर अकेले लडऩे का हौसला दिखा रही कांग्रेस एवं भाजपा दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियां रेडीमेड कैंडिडेट में निठल्ली हैं. सच्चाई ये भी है कि नवी मुंबई के 89 वार्डो में बीजेपी और कांग्रेस दोनों के पास किसी भी चुनाव में उपयुक्त उम्मीदवार नहीं मिल सके हैं ऐसे मेंनॉमिनेशन प्रक्रिया के शेष बचे 3 दिनों के भीतर विधान सभा के लिए हर सीट के लिए योग्य प्रत्याशी कहां से मिलेंगे, यह बड़ा सवाल है.

 बीजेपी-कांग्रेस के पास उम्मीदवार नहीं
एनसीपी के कब्जे वाली नवी मुंबई की दो में से एक बेलापुर सीट पर पालकमंत्री गणेश नाईक एवं दूसरी ऐरोली सीट से उनके छोटे बेटे संदिप नाईक विधायक हैं. दोनों ही पिता-पुत्र अपनी पुरानी सीट से ही दुबारा चुनाव लडऩे वाले हैं. शिवसेना के पास ऐरोली से पिछली बार हारे विजय चौगुले एक बार फि र किस्मत आजमाने वाले हैं. लेकिन बीजेपी के  पास दोनों ही सीटों पर कोई सर्वमान्य प्रतिनिधि नहीं है.  बीजेपी 4 महीने पहले एनसीपी छोड़कर कमल थामने वाली मंदा म्हात्रे को बेलापुर से टिकट देने की तैयारी में है हालांकि भाजपा के पुराने व वरिष्ठ पदाधिकारी अडिय़ल एवं तानाशाही रवैए वाली मंदा को प्रत्याशी बनाने पर खुलेआम विरोध में आ गए हैं. यहीं से मारुती भोईर एवं सतिश निकम भी भावी प्रत्याशियों की लिस्ट में हैं. बीजेपी के पास ऐरोली के लिए एक भी चेहरा सामने नहीं है. शिवसेना के पास बेलापुर से बतौर प्रत्याशी कई चेहरे कतार में हैं जिनमें शिवसेना के उपनेता एवं रिटायर्ड आईएएस विजय नाहटा, उपजिला प्रमुख एड. मनोहर गायखे, नगरसेवक विट्ठल मोरे एवं युवा सेनाधिकारी वैभव नाईक प्रमुख हैं. कांग्रेस इस लिहाज से सबसे पिछडी पार्टी है.हालांकि पिछली बार निर्दलीय चुनाव लड़े नामदेव भगत और एनसीपी के साथ गठबंधन पर नाराजगी जता चुके वर्तमान जिलाध्यक्ष दशरथ भगत प्रत्याशियों की कतार में हैं.लेकिन ऐरोली में आज भी कांग्रेस के पास कोई सिंगल फेस उपलब्ध नहीं जिसे विधानसभा चुनाव में खड़ा किया जा सके. एनसीपी प्रत्याशियों के मामले में सबसे आगे और मजबूत स्थिति में है.
अधूरी कार्यकारिणी, कमजोर जनाधार
नवी मुंबई में शिवसेना की स्थानीय कार्यकारिणी सक्रिय और मजबूत है,जबकि बीजेपी कार्यकारिणी में चुनाव के दौरान तक अधिकांश पद योग्य पदाधिकारियों के अभाव में खाली पड़े हैं. ऐरोली में बीजेपी का विधानसभा अध्यक्ष या तालुका अध्यक्ष तक नहीं है.एनसीपी में पदाधिकारियों की भीड़ जरुर है परन्तु वहां कांग्रेस और शिवसेना जिलाप्रमुखों की तुलना में एनसीपी के जिलाध्यक्ष की पहचान जनता के बीच नदारद है. यहां एनसीपी की पहचान केवल गणेश नाईक एवं उनका राजनीतिक परिवार है. बहरहाल संगठनात्मक तौर पर राष्ट्रवादी कांग्रेस अपेक्षित जनाधार मजबूत कर पाने में बिफल रही है. हालांकि  59 नगरसेवकों के साथ वह मनपा की सत्ता पर काबिज है. भाजपा के पास केवल 1 नगरसेवक है वहीं शिवसेना के पास 16 जबकि राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस के 13 नगरसवेक हैं. शिवसेना को छोड़कर मुख्यत: कांग्रेस, बीजेपी, मनसे, सपा एवं रिपाई सहित सभी पार्टियों की कार्यकारिणी अधूरी है. जमीनी स्तर पर सक्रियता कम है और जनाधार बेहद कमजोर है.

गठबंधन के बावजूद बगावत की संभावना
 नवी मुंबई की दो सीटों पर चुनावी संघर्ष से पहले ही गठबंधन होने की दशा में बगावत की बू आने लगी है. कांग्रेस खुले तौर पर अपने वर्षों के सहयोगी एनसीपी के खिलाफ नारा बुलंद करन ेलगी है. कांग्रेस के जिलाध्यक्ष दशरथ भगत हो या उपाध्यक्ष संतोष शेट्टी साफ कहने लगे हैं कि गणेश नाईक के समर्थन में काम नहीं करना है. गठबंधन की सूरत में उनका कहना है कि कांग्रेस विरोधियों को समर्थन करेगी. जाहिर है ऐसा कहने का मतलब है शिवसेना को जिताने की कोशिश. सहयोगी पार्टी कांग्रेस की इस भूमिका पर एनसीपी नेता एवं पालकमंत्री गणेश नाईक का कहना था कि विकास के दम पर एनसीपी चुनाव में जनता के सामने जाने वाली है कांग्रेस का सपोर्ट मिले न  मिले हमें जनता का भरपुर सहयोग मिलेगा. गणेश नाईक ने दुाराया कि नवी मुंबई को अत्याधुनिक शहर बनाने, जनता के विकास एवं कल्याण के लिए हम प्रतिबद्ध हैं जनता ने पहले भी प्यार दिया है आगे भी प्यार देकर विजय दिलाएगी. हालांकि बावजूद इसके सीटों पर माथापच्ची के बाद अगर शिवसेना-बीजेपी अथवा एसीपी कांग्रेस में गठबंधन हो भी जाता है तो दलगत बगावत की संभावना ज्यादा है. पिछली बार की तरह गठबंधन के लोग ही निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए अपने सहयोगी पार्टी का वोट काट सकते हैं. 2009 में कांग्रेस नवी मुंबई की एक सीट मांग रही थी नहीं मिला तो कांग्रेस ने तत्कालीन जिलाध्यक्ष नामदेव भगत को बेलापुर से जबकि वसंत म्हात्रे को ऐरोली से निर्दलीय चुनाव लडवाया, लेकिन मुंह की खायी. गठबंधन के तहत ही जनाधार का अभाव होते हुए भी बीजेपी को नवी मुंबई की एक सीट बेलापुर से चुनाव लडऩे का मौका मिला ,लेकिन वह भी हार गयी. कांग्रेस इस बार भी यही चाहती है कि एनसीपी से उसे एक सीट मिल जाए वर्ना गठबंधन न रहे.लेकिन सवाल ये है कि जब उसे नगरसेवक के लिए प्रत्याशी नहीं मिलते हैं तब  वह विधान सभा सीट के  लिए जीतने वाला सर्वमान्य प्रत्याशी कहां से लाएगी. या पिछली बार 2009 की तरह ही कांग्रेस हार का वही फिर फार्मूला दुहराएगी..
गठबंधन पर देरी : दलबदल से बचने की नौटंकी 
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि गठबंधन पर फैसले में देरी पार्टियों की सोची समझी राजनीतिक नौटंकी है. सूत्रों का दावा है कि कांग्रेस एनसीपी दोनों ने अकेले लडऩे का फैसला कर लिया है लेकिन वे अपने दलगत विरोधियों को यह मौका नहीं देना चाहती कि वे टिकट पाने किसी दूसरी पार्टी में जा सके. नॉमिनेशन में महज 3 दिन बचे हैं जबकि प्रत्याशियों की घोषणा तक नहीं होना इसका ज्वलंत सबूत है. जीत की बजाय इन चारों पार्टियों के बीच सीट की लड़ाई बनकर रह गयी है जो खतरनाक है. शिवसेना बीजेपी को 130 की मांग पर 119 से ज्यादा नहीं देना चाह रही वहीं कांग्रेस भी 135 की मांग पर राकां को 124 से अधिक नही देने पर अड़ी है. 27 सितंबर को नॉमिनेशन की आखिरी तारीख है. गठबंधन नहीं होने की दशा में अगर कुछ लोग विरोध या बगावत कर टिकट के लिए दलबदल करते भी हैं तो भी उन्हें नॉमिनेशन खत्म होने के कारण चुनाव लडऩे का मौका नहीं मिल सकेगा. इस नौटंकी में छोटी पार्टियां स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रही हैं जो गठबंधन का हिस्सा हैं.

शुक्रवार, 19 सितंबर 2014

हिम्मत न हार, चल हो जा तैयार

हिम्मत न हार, चल हो जा तैयार 

चिन्ता न कर अपने मान-सम्मान का
चिन्ता न कर प्यारे भूत-वर्तमान का

बढ़ते चलो आगे , बोल जयकार...१
हिम्मत न हार,चल हो जा तैयार....

चिन्ता से मिलता न कोई समाधान है,
वन्दे फिर इतना क्यूं सोंच परेशान है

साहस की नौका, कराए बेड़ापार...2
हिम्मत न हार,चल हो जा तैयार.....

टाइम ही टीचर है संकट में शिक्षा ले,
अपने-परायों के  प्यार की परीक्षा ले

है जीवन संघर्ष, लड़ो भरके हुंकार ....3
हिम्मत न हार, चल हो जा तैयार....

स्वारथ की दुनिया,न दूजों की आस कर
अपने जमीर, हौसलों पे विश्वास कर

तकदीर तेरी भी बदलेगी यार...4
हिम्मत न हार, चल हो जा तैयार....                        

                          -सुधीर शर्मा

               

मंगलवार, 26 अगस्त 2014

गांव-देश : बीजेपी में बेलापुर के लिए घमासान

गांव-देश : बीजेपी में बेलापुर के लिए घमासान: मंदा म्हात्रे को लेकर  विरोध /  कार्यकर्ता चाहते हैं अन्य उम्मीदवार नवी मुंबई,  लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल करने वाली बीजेपी न...

बीजेपी में बेलापुर के लिए घमासान


मंदा म्हात्रे को लेकर  विरोधकार्यकर्ता चाहते हैं अन्य उम्मीदवार

नवी मुंबई,  लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल करने वाली बीजेपी नवी मुंबई में विधान सभा चुनाव 2014 से पहले ही दो गुटों में बंट गयी है. खबर है कि राकां से बीजेपी का दामन थामने वाली मंदा म्हात्रे को बेलापुर से टिकट दिए जाने की संभावना है. हालांकि पुराने पदाधिकारी नहीं चाहते कि 2 महीने पहले पार्टी में आयी मंदा को टिकट दिया जाय. बताया जा रहा है कि वाशी के सत्रा प्लाजा में स्थित दीप भानुसाली के कार्यालय में  एक गुप्त बैठक मंदा को रोकने के लिए बुलाई गयी थी जिसमें प्रदेश सचिव वर्षा भोषले,सतीश निकम,मारुती भोईर सहित  कई स्थानीय पदाधिकारी एवं वरिष्ठ कार्यकर्ता मौजूद थे. कल्याण में इच्छुक प्रत्याशियों का जायजा लेने आए पर्यवेक्षक विपुल मेहता के सामने भी बेलापुर के लिए मंदाताई का विरोध साफ नजर आया, जब सतिश निकम के समर्थक उन्हें मंदा से बेहतर उम्मीदवार बताते नजर आए. बता दें कि नवी मुंबई बीजेपी के अधिकांश पदाधिकारी अपनी उपेक्षा एवं 15 सालों तक एनसीपी में टिकट के लिए तरसती रही मंदा म्हात्रे को बीजेपी में तत्काल टिकट दिए जाने के खिलाफ हैं.
विधान सभा टिकट के लिए मची होड़ 
फिलहाल 5 लाख की आबादी एवं 3.50 लाख मतदाताओं वाले बेलापुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की ओर से कुल 4 लोग स्वयं को भावी प्रत्याशी मान रहे हैं. इनमें प्रदेश सचिव प्रो. वर्षा भोसले, पूर्व उपाध्यक्ष मारुती भोईर, आरएसएस से आए सतिश निकम और हाल ही में राकां से आयी मंदा म्हात्रे प्रमुख हैं. हालांकि प्रांत कार्यालय से किसी के भी नाम की घोषणा नहीं होने के कारण वे स्वयं को सर्वश्रेष्ठ दिखाने की होड़ में लगे हैं. सूत्रों की मानें तो इन्होंने अपने-अपने समर्थक भी तैयार किए गए हैं जो इनकी वकालत कर सकें. गौरतलब है कि एक गुट जहां राकां से भाजपा में आयी मंदा म्हात्रे के साथ है तो वहीं दूसरा गुट संघ कार्यकर्ता रहे सतिश निकम को अपना समर्थन दे रहा है.इनके निकम फ़िलहाल संघ से बहार हैं लेकिन पिछली पहचान के लोग उनके समर्थन में खड़े हैं. इनके अलावा एक तीसरा गुट भी सामने आया है जो बीजेपी की प्रदेश सचिव वर्षा भोसले के नेतृत्व में अपने लिए चुनाव की नयी जमीन तैयार कर रहा है.योन कहें तो जितने के दौर में एक बार फिर बीजेपी को अंतर्कलह का रोग लग गया है. गैर मराठी सीवी रेड्डी को जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद से यह गुटबाजी और भी गहरा गयी है.
तो बीजेपी का जीतना होगा मुश्किल
2009 में बेलापुर से बिल्डर सुरेश हावरे चुनाव लड़े थे लेकिन गणेश नाईक से 12 हजार मतों से पराजित रहे. 2014 में प्रत्याशी किसे बनाया जाय, ऐसा कोई प्रभावी एवं सक्षम चेहरा नहीं दिख रहा जिस पर आम सहमति हो. ऐसे में चुनाव से पहले ही नवी मुंबई भाजपा का भविष्य खतरे में पड़ गया है. गौर करें तो गणेश नाईक के खिलाफ एन्टी इनकम्बैंसी होने के बावजूद नवी मुंबई में पालकमंत्री का तगड़ा वर्चस्व है. उनके खिलाफ बीजेपी की ओर से मंदा म्हात्रे के आने से मुकाबला भले ही रोमांचक हो लेकिन उसमें जीत की गुंजाईश कम ही दिखती है.  शिवसेना के आंतरिक सूत्र बताते हैं कि अधिकांश कार्यकर्ता मंदा म्हात्रे के लिए काम नहीं करना चाहते,वहीं खुद बीजेपी के अंदरखाने चल रही गुटबाजी भी उनके लिए दूसरी बड़ी चुनौती है. ऐसे में यदि मंदाताई चुनाव लड़ती हैं तो पार्टी का अंर्तकलह एवं शिवसेना की उदासीनता का फायदा सीधे तौर पर राकां के गणेश नाईक को जीत दिलाने में मददगार साबित हो सकता है.

गुरुवार, 15 मई 2014

मनी के लिए मेहनत करते मासूम


chhotu

एक गाना याद आता है नन्हे-मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है,जवाब है, मुट्ठी में है तकदीर तुम्हारी..इस गाने से उलट शहर के गली-मुहल्लों में कचरा चुनते और भीख मांगते कुछ बच्चों को देखकर सवाल उठता है कि अगर मुट्टी में तकदीर है तो फिर देश के इन नौनिहालों को खेलने की उम्र में जीने के लिए यूं मशक्कत क्यों करनी पड़ रही...नेरुल का मोनू, सानपाड़ा की रोशनी और वाशी सिग्नल का छोटू, सब बेहाल हैं. ये वो मासूम हैं जिनके नाम भले अलग हैं लेकिन हालात एक जैसे. पुर्व प्रधानमंत्री चाचा नेहरू बच्चों को देश का भविष्य मानते थे. लेकिन आज इस देश में छोटू व मोनू जैसे न जाने कितने ही नौनिहाल हैं जो घर की गरीबी, पेट की भूख और बेबशी के लिए अपने भविष्य को बेचने के लिए मजबूर हैं. देश के कानून और कल्याण योजनाओं से अछूते. अपनी मजबूरी में, मुफलिसी में, बेबस मां-बाप और परिवार के साथ. ये दिन रात
मेहनत करते हैं ताकि अंधेर रातों में घर का चूल्हा जल सके.
         पढ़ लिया तो धंधे पर जाओ
 अब जरा इस छोटू से मिल लिजिए. 13 साल का छोटू नेरूल के  मनपा स्कूल में पढ़ाई करता है, दूसरे बच्चों की तरह खेल-कूद, मौज-मस्ती उसे भी पसंद है लेकिन आर्थिक तंगी में कई भाई-बहनों की परवरिश कर रहे पिता शरीफ के लिए वह छोटे हाथ वाला मदद का मसीहा है. स्कू ल से लौटने पर बस्ता रखने के बाद संध्या पाली को घर लौटने वाले छात्रों के लिए स्कूल के पास कैन्डी बेचना उसका रोज का धंधा है. छोटू रुआंसा हो बतलाता है कि स्कूल से आने के बाद उसका बाप कहता है पढ़ के आ गया अब धंधे पे निकल जा...खेलने की चाहत और न जाने की मनसा के बावजूद भी परिजनों की परवरिश कर रहे बाप का फरमान मानकर निकलना उसकी मजबूरी है. भाड़े की खोली में मां-बाप का बनाया कैन्डी का पैकेट लिए  वह कभी नेरूल, शिरवणे तो कभी वाशी या सानपाड़ा के स्कूल-उद्यानों और गली-मुहल्लों की खाक छानता है.
रोशनी                               
     रोटी के लिए मेहनत जरुरी है
 जमीन से 15 फूट उपर पतली रस्सी पर एक पांव पर झूलती हुई रोशनी किसी स्कूल में नहीं जाती लेकिन लोहे की रिंग और रस्सियों पर सर्कस का खेल दिखाकर अपने परिवार के लिए रोज सौ-दो सौ कमा लेती है. स्कूल क्यों नहीं जाती, इस सवाल पर वो खामोश हो जाती है लेकिन उसका बाप भगीरथ बोलता है- साब गरीब हैं, काम नहीं करेंगे तो घर कैसे चलेगा. जीने के लिए पैसे नहीं फिर बच्चे कैसे पढ़ाएं.  6 साल के मोनू की कहानी भी इससे जुदा नहीं. मोनू इलाहाबाद के संगम तट पर प्लास्टिक के  डिब्बे बेचते हुए मिला था. उसे पाठशाला का नहीं पता. ठीक से अपना नाम भी नहीं बोल पाता लेकिन यहां गंगा घाट पर पाप धोने आने वालों से कहता है-डिब्बा ले लो भाई, गंगा जल भर लेना. महीनों तक चले आस्था के महामेले में वह भीख नहीं मांगा  बल्कि मनी के लिए मेहनत करता रहा. हालांकि उससे अलग शहर की सड़कों पर ऐसे कितने ही मोनू रोज दिखते हैं जो हथेलियों पर 1-2 रूपए पाने भीख मांगते हैं,आने-जाने वाली गाडिय़ों का शीशा पोछते हैं. भूखे पेट को भरने के लिए मदद  की याचना करते हैं. नंगे बदन , फटे-फुटे चिथड़े में..ये आने वाले भारत के भविष्य हैं.....

आधा दिन: पूरे घर की कमाई
Kishan-Vishal-Rajesh
इन तीन और स्कूली बच्चों को भी देख लीजिये। ये हैं राजेश, किशन और विशाल। तीनों महानगर पालिका विद्यालय में पढ़ते हैं. स्कूल से निकलने के बाद घर आते-आते 12- से एक बज  जाते हैं.  आधे दिन के  बाद  इनकी जिन्दगी की असली जद्दोजहद शुरू होती है.  दोपहर बाद एपीएमसी मार्केट में आते हैं. बड़े व्यापारियों के यहाँ से सस्ती सब्जियां और फल चुनते हैं. एक साथ बजार के सामने दुकान लगाते  हैं. माल बिका तो 100 से 200 रूपए कमा लेते हैं.  स्कूल ड्रेस में धंधे का रोज यही वसूल चलता है. ये भी भीख नहीं मांगते , मेहनत करते हैं। आधे दिन में पूरे परिवार की कमाई का जरिया है, इनका कारोबार। सस्ता और बच्चा समझकर लोग फल सब्जियां खरीद लेते हैं. जिस पर परिवार की गाड़ी चलती है। नौनिहालों की यह  कहानी देश की  आजादी के ६५ साल बाद की है. बहरहाल रोशनी का सर्कस बड़े-बच्चों को खूब लुभाता है, छोटू की कैंडी सबको पसंद आती है, लेकिन इनके मेहनत के  पीछे  आधी सदी की आजादी का दिवालियापन, दिन-दिन भर भटकने का दर्द, मौज-मनोरंजन की बजाय मुफलिसी  और मजबूरी भी साफ झलकती है. कभी नजदीक से मनी के लिए मेहनत करते इन मासूमों से रुबरू होकर आप भी अंदाजा लगाइयेगा, तब शायद आपको भी हिन्दुस्तान की 67 सालों की स्वाधीनता पर कोफ्त आ जाए.




बुधवार, 7 मई 2014

कुमार बाबू कविता सुनाओ न



जीत हार के घनचक्कर में फंसे और अमेठी से किस्मत आजमा रहे कुमार विश्वास का दिमाग डग्गम डग्ग हो रहा है. पहले राहुल आए थे तो अमेठीकरों को रिश्तों की कसमें खिला कर गए थे ,अभी वो भूला भी नहीं था कि नमो ने अपने जादुई भाषण का ऐसा पलीता लगाया कि अब अमेठीवासियों को केवल नमो नमो दिखता है. जैसे कभी कृष्ण के मथुरा से लौटने के बाद भी गोपियों को केवल हर जगह कृष्ण नजर आते थे वैसे ही अमेठी में जन-जन की जुबान पर मोदी छा गए हैं. कभी राहुल को भैया कहने वाले अमेठी के नौजवान भी अब नमो मंत्र जपने लगे हैं. क्या टीवी क्या अखबार क्या रेडियो हर तरफ मोदी के भाषणों की धूम है, चर्चा है, विश्लेषण चल रहा है. समझ नहीं आ रहा है कि अमेठी से मोदी लड़ रहे हैं या भाजपा की स्मृति इरानी. दांव पर कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी की इज्जत लगी है. क्योंकि खोने को उन्हीं के  पास सबसे ज्यादा है. स्मृति इरानी तो यहां बाहर से गयी हैं. स्थानीय कांग्रेसी उन्हें आयातित और पैराशूट प्रत्याशी कहते हैं. चारो और राहुल और स्मृति इरानी के मुकाबले की चर्चा है. ऐसे में त्रिकोणीय मुकाबले के बीच रहे आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास अचानक सूर्खियों से आऊट हो गए हैं. उनकी चिंता बढऩा लाजमी है. वे कोश रहे हैं अरविंद केजरीवाल को जिन्होंने बिना सोचे समझे मीडिया से दुश्मनी मोल ले ली. उस मीडिया से जिसने अपने पेट की कमाई को दांव पर लगाकर बिना कुछ लिए ही केजरी को बड़ा बनाया. लेकिन जैसे ही कुछ पावर आया केजरीवाल उन्हें ही जेल में डालने की योजना बनाने लगे. खैर केजरीवाल की उस नादानी का नुकसान कर्मठ  कुमार विश्वास को भोगना पड़ेगा, ऐसा किसी ने सोचा तक नहीं था वो भी ऐसे दौर में जब जनता के बीच अपनी बात पहुंचाने के लिए मीडिया ही एकमात्र माध्यम हो. बहरहाल कुमार विश्वास केजरीवाल से खफा हैं. चिंता इस बात की भी है कि अमेठी में उनका शुरुआती दौर जिस जोश में चला वह 7 मई आते आते धारशाई हो गया. चिंता इस बात की भी है कि आखिर राहुल के अरमानों पर आखिरी दौर में पानी फेर गए और मतदाताओं को भाजपा को वोट देने के लिए जगा गए मोदी ने उनका भी खेल बिगाड़ दिया. जीत हार की इस उहापोह में कुमार का विश्वास डगमगाना लाजमी है. आखिर कौन ऐसा नहीं होगा कि अपनी इज्जत दांव पर हो और न चिंता करे. बुधवार 7 मई को उन्होंने आनन फानन में भगवान देवी देवताओं को मनाया, शीश झुकाए, पांव पड़े , मन्नत मानी की जीत जाएं. पोलिंग बूथ पर आए खुद के लिए जिन्दगी में पहली बार वोट डाला. खुद की जीत के लिए दुआ मांगी. जैसे ही बाहर निकले एक आम आदमी यानी समर्थक ने फरमाइश कर डाली. भैया जी कविता सुनाओ न? अब उस समर्थक को क्या पता कि जब इंसान चिंता में हो तो कविता नहीं खीझ निकलती है. और बात जब विरोधियों के जीतने की हो तो गुस्सा आता है. भैया ऐसे में कोई कविता सुनाने की फरमाईश करे तो गाली आती है. लेकि न क्या करे समर्थक को लगा कि कवि,लेखक किसी और दुनिया के लोग होते हैं जो दुख में हंसते हैं. शायद उसे कविता की परिभाषा मालूम होगी.वियोगी होगा पहला कवि आह से निकला होगा गान...समर्थक कविता कहने की फरमाईश कर रहा था. जैसे ही आम आदमी ने कुमार को कविता सुनाने की गुजारिश की विश्वास भड़क गए. भूल गए ऐसे ही आम लोगों ने उन्हें नेता बनाया और अमेठी में जिताने के लिए जीतोड़ मेहनत की. लेकिन कुमार ने उलटा समझा. अपने नाम की तरह. नाम विश्वास कुमार होता तो शायद सीधा समझ जाते लेकिन भावनाओं की कद्र किए बिना ही समर्थक का विश्वास तोड़कर कुमार आगे बढ़ गए..शायद उनके दिमाग में राहुल और मोदी के साथ समर्थक एक नई चिंता बनकर समा गया था.





रविवार, 20 अप्रैल 2014

मेरा वोट बिकाऊ है

फोटो --गूगल से साभार 

सपनों के सौदागर खरीदते हैं वोट 


मीरगांव में फिर सभा लगी थी ऐसी सभा जैसी पहले कभी नहीं हुई. लोग दूर-दूर से आए थे. सोमरंजन को सुनने.  कहते हैं  विदेश में पढ़ते थे.लाखों रूपए तनख्वाह छोड़कर देश में ही कुछ करने की तमन्ना लेकर लौटे हैं..एकता पार्टी के सोमरंजन ने युवाओं की तकदीर संवारने का ऐलान किया. विकास का नारा दिया.घर-घर सुविधा पहुंचाने का वादा किया. बेरोजगारों के खाली हाथों में काम सौपने का किस्सा सुनाया..युवा जोश में उमड़े दिन रात काम किया..लेकिन वोटों का अंकगणित गड़बड़ाता देख युवाओं की नई थ्योरी अपनाई गयी..रिज्लट आने से पहले सोमरंजन और बिबेचन के समर्थक आपस में भीड़ गए. नारेबाजी और जयकारों के बीच संघर्ष की चिन्गारी उड़ी. शांति और भाईचारे का संदे
श देने वाले उम्मीदवारों ने ही ललकार कर जंग लड़ाई. कानून गिड़गिड़ाता रहा और नैतिकता बेजार होती रही. .....
उस दिन लोग कंधे पर बैनर होर्डिंग थामे भागे जा रहे थे.दिपंकर ने पूछ लिया का बात है मजुम चा, सब बड़ी जल्दी में दिख रहे,भागे जा रहे जैसे कवनो गाड़ी छूट रही है.मजुम चा मुस्कराकर बोले हां, पैसे की गाड़ी छूट रही है . क्यों तुझे नही मालूम क्या. दिपंकर अंजान सा- बोला नहीं चा, सच्ची नहीं मालूम तुमही बताओ न का बात है . आधी उमर समाजसेवा में गवां चुके मजुमदार चाचा जो अब सिरफ़ मजुमचा रह गएँ हैं बोले-आज फुरसू चौराहे पर रबसाहू की जनसभा है. अगर तुमको भी पैसा कौड़ी की दरकार है तो तुम भी भीड़ बनकर चले जाओ. का बात करते हो चाचा? इधर तो मनरेगा का मजूरी नहीं टैम पर मिल रही, और तुम कहते हो कि भीड़ बनने से पैसा मिलता है. विश्वास नहीं हो रहा तो भीमबलिए से पूछ ले.तभी .वंशीलाल बोल पड़ा -नेता हैं रोज थोड़े आएंगे-जो मिलता है ले लो.वर्ना पांच साल बाद ही दिखेंगे. आखिर जब हमारा वोट लेकर ये कमा रहे हैं तो हम अपना वोट इन्हें मुफत में क्यों दें. वंशी की बात मजुमचा को अच्छी ना लगी वो बोलते चले गए आज पैसे के लिए भीड़ बनकर बिकेंगे, कल पैसों के लिए वोट बेचेंगे..नहीं जानते वोट बेचने का मतलब क्या है? यह अधिकार है देश बदलने का इसे बेचना तो आने वाली पीढिय़ों का भविष्य बेचना है. मजुमचा बोलते जा रहे थे लेकिन उनकी सुनने वाला कोई न था. लोग सुनना ही नहीं चाहते.सबके मन में लालच समा गयी है. क्या जनता क्या नेता. चुनाव सबके लिए पैसा कमाने का जरिया दिख रहा है. पिछली बार भी बबनसाह के टाइम पर  यही तो हुआ था. लाख मना करते रहे. पैसों पर वोट न दो लेकिन किसी ने एक न सुनी .क्या मिला ..गरीबों का मसीहा बनने का वादा कर गए नेता बब्बनसाह, पांच सालों में एक बार पूछने तक नहीं आए. फिर दूसरे नेता पर कैसे भरोसा करें.
         
70 साल की अकलीबा भी यहां हाथ में झंडा पकड़े धूप में खड़ी थी. मन नहीं माना तो दिपंकर ने पूछ लिया-काकी तू इहां का कर रही है? अकलीबा दम संभालने लगी. मैने लाया है इसे-सोमेश बोल पड़ा-काकी पैसे कमाने आयी है.  दो घंटे रह गयी तो 200 रूपैया मिल जाएंगे. वैसे भी घर में पड़े-पड़े खासने के और करती भी क्या है. यहां इस उम्र में दो पैसे मिल जाए तो तंबाकू सूर्ती के दाम निकल आएंगे.सोमेश बोलता गया, रबसाहू ने कहा है कि जो जितना आदमी लाएगा उतना जादा पैसा मिलेगा. दिपंकर सोंचता रह गया उसके मन में आया कि वह चिल्ला कर बोल दे कि रबसाहू जैसे लोगों के बहकावे में क्यों आते हो. ये कुछ भी देने वाले नहीं.

मजुमचा बताते हैं कि बिबेचन बाबू जब यहां मीरगांव से चुनाव लडऩे आए तो उनका दिखाया सपना लोगों के जेहन में जैसे घर कर गया..भीमबलिए घूम घूम कर प्रचार कर रहा था कि वोट करो, वोट करो, नेता जी को वोट करो..घर मिलेगा-सम्मान मिलेगा, रोटी-कपड़ा-मकान मिलेगा. बिबेचन बाबू की सभा के बीच हुए संघर्ष में जब अकलीबा का सुहाग उजड़ गया था.तब उन्होंने वादा किया था कि रामसमुझ जैसे निष्ठावान कार्यकर्ता की कुर्बानी बेकार नहीं जाएगी..लेकिन यह वादा आज भी अधूरा है..अकलीबा आज तक अपना दर्द लेकर जी रही है. अपने दिल की बात  भला किसे सुनाए. वैसे भी कौन सुनता है बेवा विधवा की आवाज. अकलीबा जैसी हजार विधवाएं हैं जो सिर्फ आस में जी रही हैं.
       चार साल से अधिक गुजर गए मीरगांव की हालत नहीं बदली.पुराने वादे जस के तस हैं लेकिन बिबेचन  नेता से मंत्री हो गए. राजधानी में रहते हैं. देश विदेश में जहाज से घूमते हैं लेकिन यहां नहीं आते जहां लोगों को सपना दिखाकर गए थे. जहां लोगों से वादा कर वोट मांगे थे. नौकरी देने का, रोजगार देने का किसानों को खाद बीज देने का...यहां कुछ करने का इरादा दिखा कर गए थे. बीते जमाने की यादों के पन्ने फरफराकर उड़ते चले ..बापू ने कहा था कि देश में रामराज्य लाना है-यहां तो न राम के आदर्श दिख रहे न ही नैतिकता, फिर यह सपना कब पूरा होगा...वर्षों पहले किसी ने ऐसे ही सपने दिखाए. जो जेहन में सवाल बनकर परेशान करते हैं.
अचानक दूर से सायरन की आवाज घर्राने लगी..कुछ ही पलों में आसमान में धूल उड़ाता हेलिकाप्टर मंडराने लगा. जमा लोगों की नारेबाजी शूरू हो गयी. आखिर भीड़ नारे बाजी के लिए ही तो जमा की गयी थी.सौ में दो सौ में..मुफत में भी..जनता जय जयकार करती रही.रबसाहू के चेहरे पर भीड़ की बुलंद आवाज का असर साफ दिख रहा था..टेबल पर रखे बोटल के साफ पानी से गला तर किया..और बोलते गए..हम आपके लिए आए हैं.आप के दुख दर्द समस्याओं को जानते हैं हमने कसम खाई है कि अगर जीत कर आए तो इस इलाके को स्वर्ग बना देंगे. बिन बुलाए आए मजुमचा के दिमाग का पारा गरमा गया, मन में आया कि बोल दे नेताजी गांव की कच्ची भट्ठी का नशीला पानी पीकर पांच लोग जान गवां चुके हैं , अब कौन सा स्वर्ग बनाना चाहते हो. लेकिन मन का गुस्सा मन में ही पी डाला.
        दिपंकर चौपाल की ओर बढ़ चला, उस ओर जिधर जनसभा.हो रही थी..वहां सैकड़ों की भीड़ थी. बिबेचन बड़का नेता हैं. उनकी पहुंच दिल्ली बंबई तक है. उनके इशारे पर आला अधिकारी, पुलिस कोतवाल, हीरो-हिरोइन उमड़ते हैं.  बड़े तंबू कनात में बिबेचन बाबू माईक पर बोल रहे थे. वोट दो अपना कीमती वोट . हम घर देंगे. किसानों को बीज देंगे. खाद देंगे. नौजवानों को नौकरी, महिलाओं को रोजगार देंगे. सबको सम्मान मिलेगा, रोटी कपड़ा मकान मिलेगा..सपने भी पूरे होंगे.. बिबेचन बाबू बोलते चले गए ..ढेरों वादे इरादे सब कुछ गिनाते गए.  जाते-जाते जनता की तकदीर बदलने का वादा कर गए. सभा खतम हो गयी तो नेता गाडिय़ों में बैठकर धूल उड़ाते निकल लिए. कस्बे के समाजसेवक रबसाहू भी साथ हो लिए. पीछे फिर छूट गयी  बेरोजगारी,गरीबी, नौजवानों की रंजिश. सालों  बाद फिर चुनाव आएगा तब नए सौदागर  नए सपनों के साथ 
फिर आएंगे,और बदले में लूट -बटोर ले जाएंगे यूँ  ही ढेरों कीमती वोट. ५ सालों के लिए.……











शुक्रवार, 28 मार्च 2014

यूरोप के बाजारों में भारतीय सब्जियों पर बैन



बिना फुड प्रोसेसिंग वाले फ़ूड आइटम को नो एन्ट्री


 कभी सर्वाधिक मांग वाला भारतीय करेला और बैगन अब यूरोप के बाजारों में नहीं बिकेगा. यूरोपीय मार्केट एसोसिएशन ने भारतीय किसानों द्वारा पैदा किए जाने वाले करेला, बैगन, पड़वल तथा अरबी पत्ता के आयात पर पाबंदी लगा दी है. इसके पीछे फुड प्रोसेसिंग की कमी माना जा रहा है. बतादें कि इससे पहले यूरोप में हापुस आम के  निर्यात पर बैन लगाया जा चुका है. 1 मई से रसीले  हापुस आम के साथ ही उक्त सब्जियोंं का भी निर्यात बंद हो जाएगा. एपीएमसी के व्यापारियों ने यूरोपीय बाजार में भारतीय सब्जियों के बैन पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे हजारों किसानों और सैकड़ों निर्यातकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. गौरतलबल है कि यूरोपियन देशों में फल व सब्जियों को मार्केट में उतारने से पहले कई तरह के फुड प्रोसेसिंग ट्रीटमेंट किए जाते हैं, हालांकि भारत में इतनी तकनीकी प्रक्रियाएं नहीं अपनाई जाती. बहरहाल यूरोपियन मार्केट ने बिना प्रोसेसिंग बिदेशी फुड को अपने यहां खरीदने व बेचने पर रोक लगा दी है.

जरूरी क्यों है फुड प्रोसेसिंग

एक एक्सपोर्टर ने बताया कि किसी भी खाद्य पदार्थ खासकर फल, सब्जियों की गुणवत्ता बरकरार रखने के लिए उस प्रोसेसिंग जरूरी होती है.विदेशों में आम, सेब, संतरे,अंगूर , केला तथा अन्य फलों के साथ ही खेतों से सीधे बाजार में आने वाली सब्जियों को आम ग्राहकों को बेचने से पहले तीन तरह की वैज्ञानिक प्रक्रियाएं की जाती हैं. पहला हॉट वाटर ट्रीटमेंट, दूसरा वेप्योर हीट ट्रीटमेंट तथा तीसरा रेडिएशन ट्रीटमेंट .इन प्रक्रियाओं के बाद फलों एवं सब्जियों में किटाणुओं का दुष्प्रभाव खत्म हो जाता है साथ ही बीमारियों का खतरा भी नहीं रहता. उष्णता ख़त्म हो जाती है, उन्हें पकाने या संरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल किया गया रसायन भी धुल जाता है. यूरोप आदि देशों में खाद्य एवं औषधि प्रशासन फुड क्वाािलटी को लेकर बेहद गंभीरता के साथ निगरानी करता है, हालांकि भारत में इस पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता. अक्सर खेतों से निकाली गई सब्जियां, व पेड़ों से तोड़े गए फल धूल-मिट्टी के साथ बाजारों में बेचने के लिए लाए जाते हैं. जानकारों की राय में इस तरह की लापरवाही से कई खतरनाक बीमारियां फैलती हैं जिनका कारण नहीं पता चल पाता . केमिकल लगे अंगूर एवं केले के फलों को देख कर इसका अंदाजा लगाया जा सकता है, हालांकि पाबंदी नहीं होने से व्यापारी सीधे ग्राहकों को बेच देते हैं.

सब्जियों से सेहत का खतरा

मिली जानकारी के अनुसार कुछ दिनों पहले यूरोप में सब्जियों के कारण एक खतरनाक बीमारी के पनपने से कई लोग बीमार हो गये थे.स्थानीय सरकार ने इसके कारणों के खोजबीन के लिए प्रयास शूरू किया. सूत्रों के अनुसार इन बीमारियों के पीछे भारतीय सब्जियां भी कारण रहीं. जांच में भारतीय सब्जियों व फलों के बिना प्रोसेसिंग के ही निर्यात करने का पता चला,जिसके आधार पर यह पाबंदी का निर्णय लिया गया है. एपीएमसी भाजी मार्केट के संचालक शंकर पिंगले ने नवभारत को बताया कि भारतीय किसानों की सब्जियों पर कोई अन्न प्रक्रिया नहीं होती, सरकार ने ऐसी व्यापक व्यवस्था नहीं की है. फिलहाल बिना प्रोसेसिंग फल सब्जियों के निर्यात पर रोक से सैकड़ों निर्यातकों व किसानों को भारी नुकसान हो रहा. हम केन्द्र सरकार से इस बारे में सकारात्मक पहल की अपील करते हें कि ऐसे नियम बनाए जाएं कि भारतीय फल-सब्जियां यूरोपीय देशों के नियमों के अंर्तगत बेची जा सकें.
हर दिन 200 टन के  निर्यात पर असर
मिली जानकारी के अनुसार एपीएमसी के भाजी मार्केट से प्रति दिन तकरीबन 210 टन ताजी सब्जियां यूरोप के बाजारों में सप्लाई की जाती हैं. इनमें करेला प्रतिदिन 3 से 4 टन, बैगन 40 से 50 टन, पड़वल -100 टन अरबी पत्ता- प्रतिदिन लगभग 40 से 50 टन निर्यात होता है.विदेशों में इन सब्जियों के बैन से रोज होने वाला सवा दो सौ टन के अनुमानित निर्यात पर भारी असर पडऩे वाला है. व्यापारियों का कहना है कि निर्यात बंद होने से जहां विदेशी आमदनी रुकी है वहीं सैकड़ो टन सब्जियों का बाजार प्रभावित हो रहा है. माल ज्यादा और देशी खरीदारों की कमी से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. किसानों एवं व्यापारियों ने इस संदर्भ में के न्द्र सरकार के कृ षि व अन्न पदार्थ प्रक्रिया विकास प्राधिकरण को जिम्मेदार ठहराते हुए तत्काल प्रोसेसिंग केन्द्र खोलने की मांग की है.

मंगलवार, 25 मार्च 2014

यहाँ हर ओर दरिंदे हैं, लड़कियों संभल के रहो

आशा मिरगे -अध्यक्ष महिला आयोग महाराष्ट्र 


एनसीपी नेता और महाराष्ट्र महिला आयोग की सदस्य आशा मिरगे ने महिलाओं को बलात्कार के लिए जिम्मेदार बताकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। आशा मिरगे ने महिलाओं के साथ लगातार हो रहे यौन शोषण के लिए उनके पहनावे को जिम्मेदार ठहराया है। आशा मिर्जे महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ कांग्रेस की सहयोगी पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की नेता भी हैं। मिर्जे ने नागपुर में हुई पार्टी की महिला कार्यकर्ताओं की बैठक में कहा कि महिलाओं का रहन-सहन और पहनावा बलात्कार की घटनाओं को बढ़ावा देता है। मिरगे यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने कहा कि रेप महिला के कपड़े, चाल चलन और गलत जगह पर रहने से होते हैं। उन्होंने कहा कि 20-25 फीसदी युवतियां सजगता के आभाव में दुष्कर्म का शिकार बनती हैं।
निर्भया और फोटो पत्रकार ही दोषी!
कोर्ट ने जहाँ बलात्कारियों को दोषी मानते हुए कारवाई का आदेश दिया है वही जराज्य महिला आयोग कि अध्यक्षा खुद लड़कियों को दोषी मन रही हैं. दिल्ली के निर्भया गैंग रेप मामले में पीडि़ता को ही दोषी ठहराते हुए मिरगे ने कहा कि रात को वो दोस्त के साथ फिल्म देखने क्यों गई थी? यही नहीं मिर्जे ने मुंबई के शक्ति मिल्स परिसर में महिला फोटो पत्रकार के मामले में कहा कि महिला को सुनसान जगह जाने की क्या जरूरत थी।
मिरगे ने एनसीपी की महिला इकाई के सम्मेलन में कहा कि मैं आपको एक कविता सुनाती हूं, सावन में हिरणी संभलकर रहो नहीं तो कोई शिकारी शिकार कर लेगा। इसके बाद उन्होंने कहा, हिरणी ही क्यों कहा? हिरण क्यों नहीं?.. क्योंकि हिरणी को ही संभलकर जीने की जरूरत है। पर हम संभलकर जीते हैं क्या? ..संभलकर रहना चाहिए। इस उम्र में भी मैं मिर्ची के पैकेट साथ रखती हूं। संभलकर ही जीना चाहिए।
आशा के बयान के बारे में जब एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक से पूछा गया तो, उन्होंने इससे पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने कहा, न तो मैंने आशा के बयान को सुना है और न ही मुझे इसके बारे में कोई जानकारी है। यदि उन्होंने ऐसा कुछ कहा है, तो यह उनकी व्यक्तिगत राय है।

७० लाख वोटरों को मतदान कराएंगे ५० हजार कर्मचारी


             
 24 अप्रैल को ठाणे जिले की 4 लोकसभाओं में होने वाले चुनाव में मतदान प्रक्रिया को सम्पन्न कराने के लिए कुल 8044 मतदान केन्द्र सुनिश्चित किए गए हैं.बतादें कि 1 करोड 21 लाख 27 हजार की आबादी वाले ठाणे जिले में 4 लोकसभा क्षेत्र , और 24 विधानसभा क्षेत्र हैं.सम्पूर्ण जिले में कुल 70 लाख 61 हजार मतदाता हैं.जिनके लिए मतदान की अलग -अलग प्रक्रियाओं को पूरा कराने के लिए यहां तकरीबन 50 हजार कर्मचारियों की नियुक्ति की गयी है.जो जिले के 24 विधान सभा क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे. उप निर्वाचन अधिकारी माधवी सरदेशमुख ने बताया कि जिलाधिकारी पी वेलरासु के निर्देश पर नियुक्त कर्मचारियों को आदेश दिए गए हैं कि वे तय केन्द्रों पर अपनी ड्यूटी संभाल लें,ताकि चुनावों का काम पूरा किया जा सके.
अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण अनिवार्य
 निर्वाचन विभाग ने एक निर्देश जारी कर नियुक्त अधिकारियों व कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण शिविर में शामिल होने की अपील की गयी है.बतादें कि चुनावों की प्रक्रिया समझाने के लिए यह प्रशिक्षण 26 मार्च से 1 अप्रैल के बीच चलेगा.गौरतलब है कि अधिकारियों के लिए ये प्रशिक्षण केन्द्र अलग-अलग विधान सभा इलाकों में स्थापित किए गए हैं,जहां निर्वाचन कर्मचारियों  की तैनाती की गयी है.शिविर में उक्त मतदान क्षेत्र की राजनैतिक,सामाजिक  स्थिति,प्रत्याशियों की पृष्ठभूमि,मतदाताओं की आर्थिक,व शैक्षणिक हालात की जानकारी के साथ ही पुलिस इंतजाम,निर्वाचन में बाधा के दौरान कार्रवाईयों की प्रक्रिया आदि का विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है.
वर्ना होगी सख्त कार्रवाई
निर्वाचन अधिकारी एवं जिलाधिकारी द्वारा जारी अभिज्ञप्ति में कर्मचारियों को इस प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लेने को अनिवार्य है.इस संदर्भ में प्रशिक्षण शिविर में नहीं लेने वाले कर्मचारियों के खिलाफ लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 134 के तहत सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गयी है.
कर्मचारियों को 26 मार्च से 1 अप्रैल के बीच विशेष प्रशिक्षण में शामिल होने की अपील की है. सूत्रों की मानें तो नवी मुंबई एवं ठाणे जिले के तकरीबन 30 से 40 फीसदी कर्मचारी चुनावी जिम्मेदारियों से भाग रहे हैं,जिसको देखते हुए निर्वाचन अधिकारी ने सख्त कार्रवाई का फरमान जारी किया है.

रविवार, 23 मार्च 2014

स्याही मिटाओ, दुबारा वोट डालो



     माथाड़ी नेता स्व.अन्ना साहेब पाटिल की ३२ वीं पुण्यतिथि समारोह में पवार की बेतुकी सलाह 

नवी मुंबई के एपीएमसी वाशी में २३ मार्च को आयोजित एक सम्मेलन में हिस्सा लेने आए शरद पवार ने माथाडिय़ों को संबोधित करते हुए कहा कि ठाणे, नवी मुंबई तथा सातारा-सांगली में अलग-अलग तिथियों में चुनाव हैं, इसलिए वहां गांव में भी वोट दो और शहर आकर दुबारा वोट डालो. हजारों की संख्या में जुटे माथाडिय़ों को शरद पवार ने दुबारा मतदान से पहले अंगुली पर लगी स्याही पोछ लेने या मिटाने की सलाह दे डाली.हालांकि पवार यह बात हंसते हुए कहे लेकिन उनके जैसे एक राष्ट्रीय नेता द्वारा दिए गए इस बयान को अवैध मतदान को बढ़ावा देने वाला माना जा रहा है.जानकारों की राय है कि पवार का यह विवादित बयान इस बात का भी संके त है कि किस तरह चुनावों में फर्जी मतदान होता है.पवार जिस वक्त अपना भाषण दे रहे थे उस वक्त वाशी एपीएमसी के कांदा बटाटा मार्केट में सैकड़ों पुलिस कर्मी और उनके अधिकारियों के साथ ही निर्वाचन विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे.गौरतलब ये भी है कि ओलाबृष्टि से प्रभावितों को राहत देने की बात कहते हुए इसी मंच से जिस शरद पवार ने कुछ पलों पहले स्वीकार किया कि गलत बोलना आचार संहिता का उल्लंघन हो सकता है, वही पवार 5 मिनट बाद ही डबल मतदान की बेतुकी सलाह देते नजर आए.केन्द्रीय कैबिनेट मंत्री शरद पवार के इस विबादित बोलबचन पर विरोधियों को सुर्खियां बटोरने का मौका मिल गया है.इसी दौरान कोपरखेरणे में चुनावी प्रचार के लिए आए आप के ठाणे लोकसभा प्रत्याशी संजीव साने ने तत्काल ही पवार पर प्रतिक्रिया दे दी. साने ने कहा कि यह आचार संहिता का उल्लंघन है,इसके लिए आप शिकायत दर्ज कराएगी.शिवसेना और भाजपा ने भी केस दर्ज कराने की घोषणा की है.




शनिवार, 15 मार्च 2014

लहर लहर लहराए ये तिरंगा


ये बात हवाओंं को बताए रखना, इस तिरंगे को अपने दिल में बसाए रखना..बेलापुर का नया मनपा मुख्यालय आजक ल आने-जाने वालों से कुछ ऐसी ही अपील कर रहा है. इस अपील में जो विशेष है, वो है देश के सबसे ऊंचे ध्वज स्तंभ पर लहाराता हुआ तिरंगा..वो तिंरगा, जिसके लिए लाखों वीर जवानों ने अपनी कुर्बानियां दीं.. 225 फुट ऊंचा ध्वज स्तंभ हिन्दुस्तान के किसी और प्रांत या शहर में है भी नही. यहां 24 घंटे लहराता है तिरंगा, अपनी शान में..यही तिरंगा अब नवी मुंबई की शान बन गया है.पाम बीच रोड से होकर पुणे-मुंबई की ओर गुजरने वाले हर शख्स का दिल यहां से गुजरते हुए गुनगुनाने लगता है, रुक जा रे दिल तु बस यहीं, जो बात इस जगह है कहीं पे नहीं. सच में मन कहता है कुछ पलों के लिए यहीं ठहर जाएं, खड़े होकर खिंचवा लें एक तस्बीर ताकि यादगार बन जाए कि हमने हिन्दुस्तान के सबसे ऊंचे ध्वज स्तंभ पर तिरंगे को लहराता हुए देखा है..नवी मुंबई में..
भर आयीं आखें, उभर आया देशप्रेम
19 फरवरी को केन्द्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने जब यहां ध्वजारोहण किया तब सलामी दे रहे हजारों लोगों की आखें राष्ट्रीय स्वाभिमान के कारण डबडबा गयीं. जैस-जैसे तिंरगा झंडा उपर उठता गया उसी के साथ मादरे-वतन को बुलंदियों पर देखने का अरमान भी ऊंचा उठता चला गया. स्वाधीनता के गर्व से सीना फूलता चला गया..ऐसा कौन  नहीं होगा जिसके मन में यहां देशाभिमान का जज्बा हिलोरें न लिया हो. शायद इसी को तो कहते हैं देशप्रेम..कुछ पलों के लिए यहां अखंड भारत, अनेकता में एकता का भारत, एक भारत नजर आया..नवी मुंबई में..यह प्रतीक है भारत की स्वाधीनता का, संप्रभुता का. नवी मुंबई मनपा मुख्यालय पर लहरा रहा यह तिरंगा प्रेरक बन रहा है देशभक्ति का.
सांसद संजीव ने जड़ा सितारा 
बुलंदियों पर लहराता ध्वज सम्मान है सेटेलाईट सिटी का. नवी मुंबई के बेलबूटे में यह सम्मान का नया सितारा है.जिसे कम उम्र महापौर का लिमका रिकार्ड बनाने वाले सांसद संजीव नाईक ने जड़ा है. नवी मुंबईकरों को 24 घंटे पानी के लिए मोरबे डैम विकास और पोलियो अभियान को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए डॉ.संजीव नाईक देश भर में मशहूर हैं. सर्वोच्च ध्वज स्तंभ पर लहराता हुआ तिरंगा उनक ी दूरदर्शिता का नया इतिहास लिख गया है. इससे पहले कर्नाटक के बैंगलूरू शहर में जिंदल स्टील कंपनी में 100 फुट जबकि यहीं मीलीटरी मेमोरियल में इसी साल 23 जनवरी को सुभाष चंद्रबोस की जयंती पर 213 फुट का ध्वज स्तंभ लगाया गया है,लेकिन नवी मुंबई मनपा मुख्यालय में स्थापित स्तंभ सबसे ऊंचा है.
सेटेलाईट सिटी का और बढ़ा सम्मान
शिल्पकार गणेश नाईक ने नवी मुंबई को लोकाभिमुख पहचान दी है. सिडको द्वारा विकसित शहर को मनपा संभालती-संवारती है. आधुनिक व खूबसूरत रेलवे स्टेशन, पाम बीच रोड, खाड़ी किनारे ऊंची इमारतें, 24 घंटे पानी-बिजली सहित ढेरों मौलिक सुविधाएं .वंडर पार्क जैसे उद्यान, राजीव गांधी स्टेडियम, ऐरोली में आंबेडकर स्मारक और सीमेंट का ठाणे बेलापुर रोड  .सुनियोजित सुविधाओंं पर आधारित बेहतर जीवन स्तर विशिष्टताएं हैं नवी मुंबई की.  जिस प्रांगण में ध्वजस्तंभ लगा है मनपा की वह हरित इमारत भी ऐतिहासिक है.उद्घाटन करते हुए शरद पवार ने इसे अमेरिका के ह्वाईट हाउस की संज्ञा दी. 13 रेन हार्वेस्टिंग पिट,चारो और हरियाली,नैसर्गिक प्रकाश व्यवस्था, लोकाभिमुख कार्यालय और शीर्ष पर बिना खंभों पर टिका विशाल गुंबज उत्कृष्ट बनावट और निर्माण शैली का नमूना पेश करते हैं.यानी..पर्यावरण पूरक..सुंदर.. बेमिसाल..लेकिन इन सबसे विशेष 225 फुट के ऐतिहासिक ध्वज स्तंभ पर लहराते हुए तिरंगे ने भारतीय मानचित्र मे सेटेलाईट सिटी की शुमारी और बढ़ा दी है. यकीनन जब भी आप इधर से गुजरेंगे, बुलंदियों पर लहराते हुए इस तिंरगे को देखकर आप भी गुनगुना उठेंगे..विजयी विश्व तिरंगा प्यारा.झंडा ऊंचा रहे हमारा....








होली है भाई होली है.


मंगलवार, 11 मार्च 2014

कपड़ा लइ जा रे

शकुंतला 
इंसान जब जंगलों में रहता था, तब पेड़ों के पत्ते ओढ़ता था, जब कपड़े पहनने लगा तब वह सभ्य कहा जाने लगा . ये और बात है कि आज भी देश के 20 फीसदी भारतीयों को सभ्य दिखने के  लिए कपड़े नसीब नहीं होते. कइयों के पास इतना भी पैसा नहीं होता कि वे नए वस्त्र खरीद सकें. ऐसे लोगों के लिए रविवार पेठ राहत की बाजार है. यहां तन ढकने के लिए मनचाहे कपड़े मिल जाते हैं,भले ही वो नए नहीं होते. वैसे भी नए पुराने का भेद तो उनके लिए होता है जिनके पास चुनने की गुंजाइश होती है. लेकिन दिन भर पत्थर खदानों में पहाड़ का सीना चीर कर मजूरी कमाने वालों के लिए पुराना क्या,नयाक्या? यहां 100 रुपए में साड़ी,15 में व्लाउज,20 में कुर्ता, 25 में सलवार कमीज और 5-10 में बच्चों के कच्छे और टीशर्ट,कुर्ते भी मिल जाते हैं.यह बाजार जीवन की तीन मौलिक जरूरतों में से सबसे अहम कपड़ों की कमी को पूरा करता है.अगर ऐसे बाजार न हों तो क्या हिंदुस्तान का हर इंसान सभ्य रह पायेगा ?  रोटी के बाद कपडे की जरुरत दूसरे नंबर पर है,और मकान सबसे बाद में।लेकिन  नए दौर में पहले कपड़ा चाहिए फिर रोटी। बिना कपडे रोटी कमाने निकलने वालों को लोग पागल कहते हैं.जाहिर है जो जितना अच्छा कपड़ा पहनता है उसे उतना ही सभ्य और समृद्ध माना जाता है.बिन कपड़े का मानव पहले भी आदम था आज भी है..इसलिए कि हुकूमतों ने इससे निपटने अपना फर्ज अदा नहीं किया,  लोग सियासत में मुफलिसी के शिकार होते गए।कपड़ा बाजार भी इसी मुफलिसी की पैदाईस है.
बर्तन देकर आते हैं कपड़े


तुर्भे नाका पर स्काई वाक के नीचे आधे किलोमीटर में हर संडे सजती है ये रविवार पेठ, कपड़ों की बाजार,गरीबों की बाजार. यहां पुराने कपड़ों की आस में वे लोग आते हैं जो मजदूर होते हैं, वे भी आते हैं जो बड़े परिवार वाले हैं,जहां सबके लिए हर बार नया वस्त्र खरीद पाना मुश्किल होता है.या यूं कहें कि खरीदने के लिए पैसे नहीं होते.बाजार सजाने वाले बताते हैं कि बाबा-बेबी से लेकर भैया बाबी के लिए या चाचा-मामा सबके लिए मनचाही कीमत में मिलने वाले ये तन-बदन ढ़कने वाले ये कपड़े बर्तन देकर लाए जाते हैं.फेरीवाली कुछ महिलाएं प्लास्टिक और स्टील के बर्तनों के बदले पुराने और बिन फटे ऐसे व लेती हैं.आप ने भी कई बार कपड़ों के बदले ऐसे बर्तन बेचने वाली महिलाओं को हांक लगाते सुना देखा होगा. कहते हैं घर-घर से इकट्ठा होने वाला यही कपड़ा यहां रविवार पेठ जैसी फुटपाथी बाजारों में बिकता है.कुछ लोग इसे गोदी का माल कहकर जबकि कुछ लोग अमीरों द्वारा एक बार पहनकर छोड़ा हुआ कपड़ा कहकर बेचते हैं. हालांकि इन  बातों से परे गरीब लोगों के लिए ये सिर्फ कपड़े होते हैं जिनसे तन ढकता है.जिसे पहनने के बाद हम आदम नहीं इंसान नजर आते हैं , और सभ्य कहलाते हैं.
5 में बुशर्ट 40 में पतलून
अपने 55  साल के पति के साथ वड़ाला से हर संडे गठरी लेकर यहां दुकान सजाने वाली शकुंतला कहती है कि उसके जैसे फुटपाथी दुकानदारों की वजह से ही गरीबों के लिए तन ढकने का कपड़ा मिल जाता है. शकु समझाती है कि रविवार पेठ आम लोगों के लिए बाजार है लेकिन गरीबों के लिए खुशियां खरीदने का ठिकाना. और मेरे लिए रोजी का जरिया. 50 साल की अधेड़ शकू अपने अधेड़ और रंगरीले पति के साथ वड़ाला,कुर्ला,तलोजा और कर्जत तक बाजार हाट सजाती है.कपड़े बेचती है.यही उसकी घर गृहस्थी का साधन है. पुरषोत्तम कहता है फुटपाथ की दुकान पर शर्ट-पैंट बेचकर क्या मिलता है साब..करते धरते बस जी रहे हैं  लोग पुराने कपड़ों के लिए भी पचास मोल भाव करते हैं. जवान लोगों की बुशर्ट 5 रुपए से लेकर 30-35 रुपए में और पतलून ४०से ६० रुपए में बेचना पड़ता है.मोल भाव देखकर 50 रुपए की चीज का दाम बढाकर चढ़ाकर 150 से 200 रुपए बोलना पड़ता है. जितना मांगो,  लोग उतना थोड़े ही दे देते हैं.
 कपड़ों से जलता है चूल्हा 
कभी सुने हैं कि कपड़ों से घर गृहस्थी चलती है. मुलुंड से अपनी ननद किशोरी के साथ बाबा-बेबी के फ्राक और बुशर्ट बेचने आयी बिन्द्रा कहती है कि कपड़े न बिकें तो घर का चुल्हा नहीं जले.बिंद्रा को  कपड़े बेचने का धंधा उसकी सास ने सिखाया.वो नहीं रही तो अब ननद के साथ मिल कर कपड़ों का कारोबार खुद संभालने लगी. वह ग्राहकों को आता देख जोर जोर से आवाज देती है,साड़ी ले लो,ब्लाउज ले लो.यहां सुहागिनों के लिए रंग-बिरंगी साडिय़ां होती हैं-जारजेट की,कढ़ाई वाली,सिफान की, और भी कई तरह की. खरीदार ग्राहक साडियों की डिजाईन नहीं कीमत देखते हैं. उसकी पुरानी व चमकदार साडिय़ां 100 से 200 में बिकती हैं.बिन फटी , मजबूती और रंग-रूप के हिसाब से. मोलभाव भी खूब चलता है,लेकिन दिन भर की बाजार से 1  से डेढ़ हजार की कमाई हो जाती है..किशोरी शरमा कर बताती है कि कभी-कभी आपस में तु-तु मैं-मैं भी होती है लेकिन फिर हम ननद-भाभी बहनों की तरह काम में जुट जाती हैं, आखिर धंधा है, झगड़े से नहीं मेहनत से चलता है.

गुरुवार, 6 मार्च 2014

हर-हर मोदी, घर-घर मोदी


देश में नरेंद्र मोदी नेतृत्व करें इसके समर्थन में भाजपा के अलावा भी प्रयास तेज हो गए हैं.ये प्रयास अलग-अलग राज्यों में सामाजिक संस्थाओं व ऐसे नौजवानों द्वारा चलाए जा रहे हैं, जो कांग्रेस और यूपीए की भ्रष्टाचार और महंगाई बढ़ने वाली राजनीती से आजिज आ चुके हैं. मोदी को पीएम बनाने ये गैर राजनैतिक कार्यकर्ता घर-घर जाकर प्रचार कर रहे हैं,बेहतर होने का अंतर बता रहे हैं.हर घर से एक चम्मच चाय मांग रहे हैं.उनका कहना है कि इकठ्ठा की गयी चाय को नमो नुक्कड़ पर बनाएंगे और जनता को पिलाकर चर्चा करर्ते हुए वोट फॉर इंडिया की अपील करेंगे। १ से लेकर १५ अप्रैल तक यह अभियान चलेगा।खासकर महाराष्ट्र के ठाणे,नवी मुम्बई,रायगढ़ जिले तथा मुम्बई में. यहाँ २४ अप्रैल को चुनाव होने वाले हैं। उम्मीद है कि नमो की चाय पीकर मतदाता देश के लिए मोदी को जरुर वोट देंगे,जिताएंगे भी। इस पुरे अभियान की शुरुआत नमो नवी मुम्बई ब्रिगेड ने की है.उसकी दलील है कि पुर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने देशोत्थान के लिए विजन-2020 के जरिए भारत की खुशहाली और विकास का जो सपना देखा था, कांग्रेस ने 10 सालों में उस विजन का सत्यानाश कर दिया. देश में भ्रष्टाचार,घोटाले और मंहगाई के कारण जनता परेशान है. आजादी के 67 सालों बाद भी देश के कई हिस्से बिजली,पानी, शिक्षा, चिकित्सा व परिवहन आदि मौलिक सुविधाओं से बदहाल हैं. यह कांग्रेस नित यूपीए सरकार की देन है. कुछ ऐसे ही राजनैतिक आरोपों के साथ नमो ब्रिगेड भाजपा के पीएम प्रत्याशी को जिताने का अभियान चला रहा है. ब्रिगेड अपील कर रहा है कि  देश को बदहाली से निकालने और दुनिया का सिरमौर बनाने के लिए नरेन्द्र मोदी गम्भीर हैं. उनका सपना है कि देश के  हर नौजवान को रोजगार व हर महिला को सम्मान मिले, किसानों का उत्थान हो, शिक्षा,स्वास्थ्य सेवाएं गांव-गली तक पहुंचे. सरहदें सुरक्षित रहें. संसाधनों का विकास हो और देश में खुशहाली बढ़े. नमो के इस मिशन को सफल बनाने के लिए 2014 का लोकसभा चुनाव सबसे बेहतर मौका है. ब्रिगेड के अभियान का नाम है "नमो नवी मुंबई" जो नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए चलाया जा रहा है.
मुक्ति के लिए मोदी,उन्नति के लिए मोदी 
पेशे से इंजीनीयर नमो नवी मुंबई अभियान के संयोजक सतीश निकम कहते हैं  कि भारत की प्रगति के लिए, किसानो, युवाओं व महिलाओं की उन्नति के लिए, भ्रष्टाचार-मंहगाई से मुक्ति के लिए नरेन्द्र मोदी हिन्दुस्तान की जरूरत हैं. उन्हें पी एम बनाने के लिए देश भर कि  200 से अधिक सामाजिक संस्थाएं भी समर्थन जुटाने में लगी हैं . एसएमएस के माध्यम से नमो के समर्थन में लोग जुड़ रहे  हैं जिनमें छात्र,नौकरीपेशा,वकील और कारोबारी शामिल हैं.साम्प्रदायिकता कि भावना से परे मुस्लिम युवक भी मोदी के समर्थन में आगे आ रहे हैं जो उनकी बढ़ती सर्व मान्यताका संकेत है. सब चाहते हैं कि मोदी पीएम बनें. 

वोट के लिए रुक जाओ, मुलुक न जाओ


उत्तरभारतीय मतदाताओं को लुभा रहे राजनेता 

प्रभु जी तुम चन्दन हम पानी 
24 अप्रैल को घोषित आम चुनावों को लेकर सभी दल हार -जीत का गणित बिठाने लगे हैं, ऐसे में उन्हें उत्तर भारतीय मतदाताओं का अस्तित्व समझ आने लगा है. वो उत्तर भारतीय जिनके दम पर मुंबई -ठाणे में प्रत्याशियों का भविष्य तय होता है. हालांकि उत्तर भारतीय सिर्फ वोटों के लिए इस्तेमाल किए जाने से चिढ़े और गुस्से में हैं. इसलिए उन्हें मनाने, फुसलाने के प्रयास जोर पकडऩे लगे हैं. चुनाव सर पर है फलस्वरूप राजनीतिक दलों को उत्तर भारतीय मतदाता कमाऊ पूत की तरह दिखने लगे हैं. 24 अप्रैल को तय चुनाव में उनके मतों का फायदा मिल सके इसलिए उन्हें गांव जाने से रोकने की कोशिशें भी तेज हो गयी हैं. लुभाने वाली पार्टियों में एनसीपी सबसे आगे जबकि शिवसेना,कांग्रेस और सपा उसके पीछे हैं. सुत्रों का दावा है कि मराठी माणूस में कमजोर होती जा रही पकड़ देखते हुए मनसे भी उत्तरभारतीयों में घुसपैठ बनाने में जुट गयी है.
मुलुक नहीं गए तो मिलेगा मकान!
सूत्रों की मानें तो नवी मुंबई और ठाणे में रहने वाले हजारों उत्तर भारतीयों को रोकने के लिए कई तरह के प्रलोभन दिए जा रहे हैं. जिसमें मुलुक आने-जाने के लिए कन्फर्म रेलवे टिकट, बच्चों के लिए 2 महीनों की फीस,नकद रूपए, और मोटर साइकल शामिल है.सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि जिन लोगों के साथ 100 से अधिक समर्थक या सोसायटी का कन्फर्म वोट बैंक है "उन्हें" वन रुम किचन वाले मकान का भी आफर दिया जा रहा है. जाहिर है यह सब वोट हथियाने का हथकंडा है. सूत्रों की मानें तो इसका फायदा उठाने के लिए कई मरणासन्न हिन्दी भाषी संगठन अचानक जिंदा हो उठे हैं, और जगह-जगह सभा समारोहों का आयोजन कर नेताओं को अपने वोट बैंक की झलक दिखाने के प्रयास में जुटे हैं.
हिन्दी भाषियों के सहारे हार-जीत 
गौरतलब है कि मुंबई,ठाणे तथा रायगढ़ में उत्तर भारतीयों की आबादी तकरीबन 7 लाख है जो किसी भी पार्टी की हार-जीत का राजनीतिक समीकरण बिगाडऩे की औकात रखती है. यही वजह है कि राकां,कांग्रेस, शिवसेना और समाजवादी सभी पार्टियां हिन्दी भाषियों को लुभाने की कवायद में जुटी हैं. प्रलोभन के साथ उन्हें जबरन रोकने की कोशिश भी की जा रही है ताकि वे मुलुक न भाग सकें.उन्हें रोकने में लोभी हिन्दी भाषी नेता मोहरा बन रहे हैं. हाल ही में ठाणे के पालकमंत्री गणेश नाईक ने चुनाव तक उत्तर भारतीयों को हर हाल में रोकने का खुला निर्देश दिया था. उन्होंने यहां तक कहा था कि वोट देने के बाद जाने वालों को मुलुक का कन्फर्म टिकट वे खुद देंगे. लेकिन असली सवाल ये है  जिन शादी-विवाह आदि पारिवारिक संस्कारों से उत्तर भारतीय जुड़े हैं उसे नेताओं के राजनीतिक फायदे के लिए छोड़ देना कितना जायज है. हकीकत ये भी है कि कुछ लोग पैसों के लोभ और बहकावे में अपने परिवार और संस्कारों को तिलांजलि दे रहे हैं.

बुधवार, 5 मार्च 2014

हटी लालबत्ती-जब्त होंगे हथियार

NM.CP.K.L PRASAD
लोकसभा चुनाव: आचार संहिता लागू
सुरक्षा-सतर्कता में जुटी पुलिस

नवी मुंबई,थाणे में 5 मार्च से आचार संहिता लागू हो गयी है. यहाँ 24 अप्रैल को  लोकसभा चुनाव होंगे।इसके मद्दे नजर पुलिस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं.नवी मुंबई के नव नियुक्त पुलिस आयुक्त के.एल.प्रसाद ने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग से कई दिशा निर्देश प्राप्त हुए हैं जिसके अनुसार चुनाव में अशांति व खलल डालने वाले तत्वों पर नकेल कसने की कार्रवाई की जा रही है.उन्होंने कहा कि आम चुनाव शांति पुर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस व निवार्चन अधिकारियों के बीच चर्चा शुरू है.शहर के संवेदनशील इलाकों की पहचान तथा आपराधिक गतिविधियों की निगरानी, अपराधियों की दर-पकड़ के साथ ही बाहरी व संदिग्द लोगों को लेकर विशेष सतर्कता पर हमारा जोर है,ताकि कोई व्यवधान न पैदा हों.

पुलिस आयुक्त के.एल.प्रसाद ने कहा कि निर्वाचन आयोग के नियम-निर्देशों के अनुसार वीआईपी वाहनों से लाल बत्ती हटानेव लाईसेंसी हथियारों को जमा कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.उन्होंने भरोसा दिलाया कि चरण बद्ध तरीके से तथा कड़ाई के साथ चुनाव आदेशों का लागू किया जाएगा.नए सीपी ने बताया कि फिलहाल निर्वाचन विभाग द्वारा अपराधियों पर की गयी कार्रवाई और अन्य खुफिया रिपोर्ट मांगी गयी है जिसके लिए पुलिस काम में जुटी है.पुलिस आयुक्त ने दुहाराया हम चुनाव को सफलता पुर्वक संपन्न कराने के साथ ही पुलिसिया काम काज को बेहतर बनाने पर गंभीर हैं.